grate india

क्या बात है हमारे देश की हमारे यहाँ जब कोई खिलाडी कुछ जीतता है तो उस पर इनामो की बारिश हो जाती है उसे सर आँखों पर बिठा लिया जाता है.यहाँ तक की हमारी सारकार बी उस पर लाखो लुटा देती है लेकिन जब वहीँ जब कोई सैनिक मरता है देश के लिए तो उसके परिवार वालो का क्या हल होता है ये सब जानते है कल कारगिल के विजय दिवस पर ये सब देखने में आया तो अच्छा नहीं लगा हमारे

Wednesday, February 2, 2011

कसूर किसका?

बरेली हादसे का कसूर किसका था?


उनका जो अपनी बेरोजगारी दूर करने के लिए वहा पहुंचे थे ?
या उनका जिन्होंने उन्हें बुलाया था ?
या उनका जिनके ऊपर इन सबकी जिम्मेदारी थी यानि प्रशासन पर ?
कसूर किसी का भी हो ये तो साफ हो गया कि हमारे यहाँ हादसों के बाद कोई भी उस से सबक लेने वाला नहीं है
ये कोई पहली बार नहीं हुआ हमारे यहाँ पहले भी कई बार ये हो चुका है लेकिन कोई तो अपनी जिम्मेदारी समझे। उस से सबक ले । हादसा हो गया उसके बाद स्थिति कबो में करने के बजाये सब के सब जुट गए एक दुसरे के सर ठीकरा फोड़ने में itbp कहती है उसने जिला प्रशासन को बता दिया था। यानियो की उसे अनुमान था की कितनी संख्या हो सकती है लडको की क्या किसी को बता देने भर से उस समस्या का हल हो जाता है ?

आपने एक बार भी सोचा कि कितना भयंकर परिणाम हो सकता है इसका । मात्र बता देने से इंतजाम हो जाता है क्या?
और बात रही स्थानीय प्रशासन कि जब सब पता था तो फिर क्यों की गयी इतनी बड़ी लापरवाही जिसका दूरगामी परिणाम उन बचों के माता पिता को भुगतना पड़ेगा जिन्होंने इस हादसे में अपने बचों को खोया ?
रेलवे का तो कहना ही क्या उसके लिए तो ये हादसे आम बात हैं उत्तरप्रदेश और बिहार में तो येरोज की बात है की वहा यात्री ट्रेनों की छतों और पायदानों पर खेड़े होकर सफ़र करते हैं जब ट्रेनों में इतनी भीड़ थी तो क्यों न रेलवे ने इंतजाम किया विशेष ट्रेनों का ? जहा पर हादसा हुआ उस से पहले भी एक स्टेशन पड़ता है वहा क्यों नहीं रेलवे ने उन यात्रियों को उतार दिया ? क्या उस समय रेलवे के अफसर सो रहे थे जब ट्रेन वहां से गुजर रही थी ?
और बरेली में ही स्टेशन में उन्हें रोक क्यों नहीं दिया गया क्या रेलवे को हादसे का कोई अहसास नहीं था ? ये हादसा पहली बार तो नहीं हुआ है ? या फिर रेलवे को सिर्फ अपने ticket बेचने होते हैं?
तभ तो रेल मंत्री ममता बनर्जी ने घटना स्थल पर जाना भी मुनासिब नहीं समझा ।
राज्य सरकार का तो राम ही मालिक है उनके परिजनों को सांत्वना देना तो दूर मायावती जी ने पूरा का पूरा ठीकरा itbp के सर फोड़ दिया ?
वैसे मायावती जी ने ठीकरा फोड़ने और पार्क बनाने के आलावा किया ही क्या है उत्तरप्रदेश में ?
अब समय आ गया है की हम अपनी गलतियों से सबक लेते हुए आगे बड़े? ताकि बरेली जैसे हादसों का हमें फिर से सामना ना करना पड़े

भगवन उन बचों की आत्मा को शांति प्रदान करें और आगे इस तरह की घटनाओ से बचों को बचाएं



आपका
हेम चन्द्र पांडे

Sunday, January 16, 2011

आरक्षण क्या है?

ये ब्लॉग में उन लोगो के लिए लिख रहा हु जो आरक्षण के प्रबल समर्थक हैं ... हे आरक्षण के समर्थकोमें आप लोगो से पूछना चाहता हु कि आरक्षण क्या है ?
आपको जवाब देने के लिए ज्यादा दिमाग लगाने कि जरुरत नहीं है... बस ये देख लीजिये कि इसने क्या हाल कर दिया है देश का अभी कुछ दिन पहले ही उत्तराखंड सरकार ने इंटर कॉलेज में प्रवक्ता पद के लिए साक्षात्कार लिया था अब उसके रिजल्ट आने लगे है जरा उस रिजल्ट पर ध्यान दीजियेगा बस पता चल जायेगा कि आपके आरक्षण ने शिक्षा कि कैसी पोल खोल दी है उत्तराखंड में ....... उसमे साफ़ दिख रहा है आपके आरक्षण का हाल?
उसमे 3७% वाला अभ्यर्थी जो कि आरक्षण के दाएरे में आता है उसका तो चयन हो गया लेकिन वो जो ६०% लेकर आया उसका चयन नहीं हो पाया क्योकि वो आरक्षण के दाएरे में नहीं आता था क्या ३७% वाला ६० वाले से आछा पड़ा पायेगा में तो कहता हु किजिसे खुद पढने कि जरुरत है वो क्या पदायेगा
कहती है कि हर बच्चे को शिक्षा मुफ्त में मिलेगीक्या मुफ्त में वो दिया जायेगा जो खुद के कम का ना हो वाह जी वाह अगर शिक्षा का यही हाल रहा तो सरकारी स्कूलों का तो राम ही मालिक है ...
में ये इसलिए नहीं लिख रहा कि मुझे आरक्षण नहीं मिल रहा ये मेरा गुस्सा उन लोगो पर है जिन्होंने आरक्षण को वोट बैंक बना लिया है..........
आरे भैया अब तो भोली भली जनता को आरक्षण के नाम पर बेवकूफ मत बनाओ.... ये लोग अब समझदार होने लगे है जिस दिन जाग गए ना तुम्हारी पतलून कमर से ऐसे गिरा देंगे जैसे सर्कस में ........ की अभी भी समय है संभल जाओ कम से कम शिक्षा और चिकित्सा में तो आरक्षण मत दो क्यों तुम सरकारी स्कूलों का सत्यानाश मार रहे हो इससे बछो की शिक्षा पर क्या असर पढ़ेगा हम भी तो सरकारी स्कूल में पढ़ते है हम जैसे गरीब बछो का क्या होगा ????? थोडा सा सोचो


आपका
हेम चन्द्र पांडे
ये है हमारा महान भारत