बरेली हादसे का कसूर किसका था?
उनका जो अपनी बेरोजगारी दूर करने के लिए वहा पहुंचे थे ?
या उनका जिन्होंने उन्हें बुलाया था ?
या उनका जिनके ऊपर इन सबकी जिम्मेदारी थी यानि प्रशासन पर ?
कसूर किसी का भी हो ये तो साफ हो गया कि हमारे यहाँ हादसों के बाद कोई भी उस से सबक लेने वाला नहीं है
ये कोई पहली बार नहीं हुआ हमारे यहाँ पहले भी कई बार ये हो चुका है लेकिन कोई तो अपनी जिम्मेदारी समझे। उस से सबक ले । हादसा हो गया उसके बाद स्थिति कबो में करने के बजाये सब के सब जुट गए एक दुसरे के सर ठीकरा फोड़ने में itbp कहती है उसने जिला प्रशासन को बता दिया था। यानियो की उसे अनुमान था की कितनी संख्या हो सकती है लडको की क्या किसी को बता देने भर से उस समस्या का हल हो जाता है ?
आपने एक बार भी सोचा कि कितना भयंकर परिणाम हो सकता है इसका । मात्र बता देने से इंतजाम हो जाता है क्या?
और बात रही स्थानीय प्रशासन कि जब सब पता था तो फिर क्यों की गयी इतनी बड़ी लापरवाही जिसका दूरगामी परिणाम उन बचों के माता पिता को भुगतना पड़ेगा जिन्होंने इस हादसे में अपने बचों को खोया ?
रेलवे का तो कहना ही क्या उसके लिए तो ये हादसे आम बात हैं उत्तरप्रदेश और बिहार में तो येरोज की बात है की वहा यात्री ट्रेनों की छतों और पायदानों पर खेड़े होकर सफ़र करते हैं जब ट्रेनों में इतनी भीड़ थी तो क्यों न रेलवे ने इंतजाम किया विशेष ट्रेनों का ? जहा पर हादसा हुआ उस से पहले भी एक स्टेशन पड़ता है वहा क्यों नहीं रेलवे ने उन यात्रियों को उतार दिया ? क्या उस समय रेलवे के अफसर सो रहे थे जब ट्रेन वहां से गुजर रही थी ?और बरेली में ही स्टेशन में उन्हें रोक क्यों नहीं दिया गया क्या रेलवे को हादसे का कोई अहसास नहीं था ? ये हादसा पहली बार तो नहीं हुआ है ? या फिर रेलवे को सिर्फ अपने ticket बेचने होते हैं?
तभी तो रेल मंत्री ममता बनर्जी ने घटना स्थल पर जाना भी मुनासिब नहीं समझा ।
राज्य सरकार का तो राम ही मालिक है उनके परिजनों को सांत्वना देना तो दूर मायावती जी ने पूरा का पूरा ठीकरा itbp के सर फोड़ दिया ?
वैसे मायावती जी ने ठीकरा फोड़ने और पार्क बनाने के आलावा किया ही क्या है उत्तरप्रदेश में ?
अब समय आ गया है की हम अपनी गलतियों से सबक लेते हुए आगे बड़े? ताकि बरेली जैसे हादसों का हमें फिर से सामना ना करना पड़े
भगवन उन बचों की आत्मा को शांति प्रदान करें और आगे इस तरह की घटनाओ से बचों को बचाएं
आपका
हेम चन्द्र पांडे